व्याकरण (कक्षा VIII)
अध्याय 25: मुहावरे
महत्त्वपूर्ण मुहावरे
अंग-अंग ढीला होना — बहुत थक जाना
वाक्य: दिन भर काम करने के कारण मेरा अंग-अंग ढीला हो गया।
अँगूठा दिखाना — मना करना
वाक्य: सोमेश से पुस्तक माँगने पर उसने अँगूठा दिखा दिया।
अक्ल का दुश्मन — मूर्ख
वाक्य: उसको समझाने पर भी कुछ समझ में नहीं आता, क्योंकि वह अक्ल का दुश्मन है।
अँधेरे घर का उजाला — इकलौता पुत्र
वाक्य: रवैशंकर अपने माता-पिता का अँधेरे घर का उजाला है।
अंधे को दीपक दिखाना — नासमझ को उपदेश देना
वाक्य: दीक्षा को समझाना तो अंधे को दीपक दिखाना है।
अपनी खिचड़ी अलग पकाना — सबसे अलग होकर काम करना
वाक्य: कक्षा में कई छात्र अपनी खिचड़ी अलग पकाते हैं।
अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना — अपनी बड़ाई खुद करना
वाक्य: बातूनी लोग अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनते हैं।
अपने पाँव पर खुद कुल्हाड़ी मारना — अपनी हानि स्वयं करना
वाक्य: रमेश ने स्कूल छोड़कर अपने पाँव पर खुद कुल्हाड़ी मारी।
आकाश-पाताल एक करना — बहुत परिश्रम करना
वाक्य: तेजस ने प्रथम श्रेणी में पास होने के लिए आकाश पाताल एक कर दिया।
आग-बबूला होना — बहुत क्रोध करना
वाक्य: विद्यार्थियों के अनुचित व्यवहार पर प्रायः अध्यापक आग बबूला हो जाते हैं।
अक्ल के घोड़े दौड़ाना — किसी बात का हल ढूँढ़ना
वाक्य: देश की समस्याओं के बारे में नेता अक्ल के घोड़े दौड़ाते हैं।
आँखों में धूल झोंकना — धोखा देना
वाक्य: डाकू, पुलिस की आँखों में धूल झोंककर भाग गए।
आँखें चुराना — नज़र बचाना
वाक्य: चोर आँखें चुराकर भाग गए।
आँखें बिछाना — प्रेम से स्वागत करना
वाक्य: जनता ने प्रधानमंत्री के आने पर आँखें बिछा दी।
आस्तीन का साँप — कपटी मित्र
वाक्य: कक्षा की शिकायत करने वाला लड़का सभी छात्रों के लिए आस्तीन का साँप है।
आटे दाल का भाव मालूम होना — कष्ट का अनुभव होना
वाक्य: अपने पर जिम्मेदारी आने पर ही आदमी को आटे-दाल का भाव मालूम होता है।
आकाश के तारे तोड़ना — बहुत कठिन काम करना
वाक्य: परीक्षा में प्रथम आना आकाश के तारे तोड़ना है।
आसमान सिर पर टूटना — विपत्ति पड़ना
वाक्य: पिता की मृत्यु के बाद रमेश पर आसमान टूट पड़ा।
ईंट से ईंट बजाना — किसी को ध्वस्त करना
वाक्य: भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान की ईंट से ईंट बजा दी।
ईद का चाँद होना — बहुत दिनों के बाद मिलना
वाक्य: ग्रीष्मावकाश पड़ने पर रमेश ईद का चाँद हो गया।
ईंट का जवाब पत्थर से देना — शत्रु का मुकाबला दृढ़ता से करना
वाक्य: भारतीय सेना ने पाकिस्तान को ईंट का जवाब पत्थर से दिया।
उल्टी गंगा बहाना — प्रतिकूल बातें करना
वाक्य: हमारे नेता अपने स्वार्थ के लिए उल्टी गंगा भी बहा देते हैं।
ओखली में सिर देना — जान बूझकर आपत्ति मोल लेना
वाक्य: जब ओखली में सिर दे दिया तो घबराते क्यों हो?
कफ़न सिर पर बाँधना — मरने की परवाह न करना
वाक्य: क्रांतिकारी लोग सिर पर कफ़न बाँधकर काम करते हैं।
कटे पर नमक छिड़कना — दुखी को और दुखी करना
वाक्य: उसके फेल होने के बाद उसके साथ कटु व्यवहार करके कटे पर नमक मत छिड़को।
कागज़ी घोड़े दौड़ाना — केवल बहुत लिख पढ़ी करना
वाक्य: आजकल सरकारी काम करने के लिए कागज़ी घोड़े दौड़ाने पड़ते हैं।
कान पर जूँ न रेंगना — तनिक भी असर न होना
वाक्य: आजकल जनता के काम के लिए नेताओं के कान पर जूँ नहीं रेंगती।
कान भरना — चुगली करना
वाक्य: कई छात्रों को अध्यापक के कान भरने की आदत होती है।
काँटे बिछाना — बाधा डालना
वाक्य: दुष्ट लोग सदा दूसरों के रास्ते में काँटे बिछाते हैं।
किताबी कीड़ा — सदा पढ़ने में लगा रहने वाला
वाक्य: हमारी कक्षा में महेश किताबी कीड़ा है।
कोल्हू का बैल — बहुत अधिक मेहनती
वाक्य: मज़दूर लोग कोल्हू के बैल की तरह काम करते हैं।
गागर में सागर भरना — थोड़े शब्दों में अधिक बात कहना
वाक्य: विद्वान पुरुष गागर में सागर भर देते हैं।
गड़े मुर्दे उखाड़ना — पुरानी बातें फिर से दोहराना
वाक्य: गड़े मुर्दे उखाड़ने से आपसी प्यार कम हो जाता है।
गुदड़ी के लाल — छिपा हुआ गुणी व्यक्ति
वाक्य: भारतवर्ष में बहुत लोग गुदड़ी के लाल हैं।
घड़ों पानी पड़ना — लज्जित होना
वाक्य: गुरुजी से झूठ बोलने पर रमेश पर घड़ों पानी पड़ गया।
घी के दिए जलाना — खुश होना
वाक्य: नेताओं के घरों में आजकल घी के दिए जलते हैं।
घोड़े बेचकर सोना — गहरी नींद में सोना
वाक्य: परीक्षा समाप्त होने पर छात्र घोड़े बेचकर सो जाते हैं।
घाट-घाट का पानी पीना — अत्यन्त अनुभवी
वाक्य: आफ़ताब के पिता ने घाट-घाट का पानी पी रखा है।
चिराग तले अँधेरा — गुण के साथ दोष
वाक्य: थाने के पास चोरी होना चिराग तले अँधेरा है।
चुल्लू भर पानी में डूब मरना — अत्यन्त लज्जित होना
वाक्य: अध्यापक से झूठ बोलकर तुम्हें चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।
छठी का दूध याद आना — भारी संकट में पड़ना
वाक्य: थोड़ी-सी गलती छठी का दूध याद करा सकती है।
छाती पर साँप लोटना — ईर्ष्या से जलना
वाक्य: भारत की उन्नति देखकर पाकिस्तान की छाती पर साँप लोटते हैं।
डंके की चोट कहना — खुलेआम कहना
वाक्य: निर्भीक लोग अपनी बात डंके की चोट पर कहते हैं।
तारे गिनना — कष्टपूर्वक रात बिताना
वाक्य: रोगी ने सारी रात तारे गिनकर काटी।
दाँत खट्टे करना — हराना
वाक्य: युद्ध में भारत ने पाकिस्तान के दाँत खट्टे कर दिए।
दाँतों तले अँगुली दबाना — आश्चर्यचकित रहना
वाक्य: ताजमहल देखकर लोग दाँतों तले अँगुली दबाते हैं।
दाल में काला होना — संदेह की बात होना
वाक्य: साफ़-साफ़ क्यों नहीं बताते, दाल में कुछ काला लगता है।
पेट में चूहे कूदना — बहुत भूख लगना
वाक्य: स्कूल से आकर बच्चों के पेट में चूहे कूदने लगते हैं।
भीगी बिल्ली बनना — डरकर दब जाना
वाक्य: कक्षा में अध्यापक के आते ही सभी छात्र भीगी बिल्ली बन जाते हैं।
लोहे के चने चबाना — कठिन काम करना
वाक्य: कक्षा में प्रथम आना लोहे के चने चबाना है।
अभ्यास प्रश्नोत्तर (मुहावरे)
1. नीचे लिखे मुहावरों को वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए—
अपनी खिचड़ी अलग पकाना
कोल्हू का बैल
गुड़ गोबर करना
भीगी बिल्ली बनना
हवाई किले बनाना
2. निम्न अर्थों हेतु मुहावरा दीजिए—
नासमझ को उपदेश देना
नज़र बचाना
बाधा डालना
बहुत भूख लगना
धोखा देना
3. निम्न वाक्यों को सही मुहावरे से पूरा कीजिए—
(क) बच्चे कमाकर माता-पिता का सहारा बनते हैं, तुम बूढ़े माता-पिता से सदा पैसे ऐंठते रहते हो क्यों उल्टी ................... रहे हो?
(ख) कई फैक्ट्रियों में मजदूरों से ................... की भाँति काम लिया जाता है।
अध्याय 26: लोकोक्तियाँ
महत्त्वपूर्ण लोकोक्तियाँ
अक्ल बड़ी या भैंस — शरीर की अपेक्षा बुद्धि बड़ी होती है
वाक्य: लक्ष्य मोटा तगड़ा लड़का है लेकिन पढ़ने में कमज़ोर इसलिए गुरु जी प्रायः कहते हैं अक्ल बड़ी या भैंस।
अधजल गगरी छलकत जाय — ओछा मनुष्य अधिक इतराता है
वाक्य: दीपक दसवीं फेल है लेकिन डींग मारता है बी.ए. पास की तरह क्योंकि अधजल गगरी छलकत जाय।
आम के आम गुठली के दाम — दोहरा लाभ
वाक्य: समाचार पत्र पढ़ कर बाद में रद्दी में बेच दो। इसे कहते हैं—आम के आम गुठली के दाम।
अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता — एक व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता
वाक्य: विशेष लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दूसरों का सहयोग लेना पड़ता है क्योंकि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।
आँख का अंधा नाम नयन सुख — गुणों के विरुद्ध नाम होना
वाक्य: हमारी कक्षा का होशियार सिंह पढ़ने में बिलकुल बुद्धू है। ठीक ही कहा है आँख का अंधा नाम नयन सुख।
ऊँट के मुँह में जीरा — आवश्यकता के अनुसार वस्तु न होना
वाक्य: एक पहलवान को जब नाश्ते में केवल दूध और फल दिए गए तो वह बोल उठा—ऊँट के मुँह में जीरा।
ऊँची दुकान फीका पकवान — दिखावे के अनुरूप वस्तु न होना
वाक्य: आजकल के दुकानदार वस्तु घटिया होने पर भी सजावट व दिखावा ज़ोरदार करते हैं। इसी को कहते हैं—ऊँची दुकान फीका पकवान।
एक मछली सारे तालाब को गंदा करती है — एक बुरे के कारण सब बुरे बन जाते हैं
वाक्य: हमारी कक्षा में एक लड़का चोरी करता है उसके कारण सारी कक्षा बदनाम हो रही है क्योंकि एक मछली सारे तालाब को गंदा करती है।
कंगाली में आटा गीला — मुसीबतों में और मुसीबत आना
वाक्य: एक तो देवराज के पिताजी की नौकरी चली गई दूसरा उसकी माताजी बीमार हो गई तो सभी ने कहा कंगाली में आटा गीला।
कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली — दो व्यक्तियों की स्थिति में बहुत अंतर
वाक्य: एक बच्चे की तुलना अध्यापक से नहीं की जा सकती है। कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली।
काला अक्षर भैंस बराबर — अनपढ़
वाक्य: बलराज एक मज़दूर है। उसके लिए तो काला अक्षर भैंस बराबर है।
खोदा पहाड़ निकली चुहिया — अधिक मेहनत, कम लाभ
वाक्य: रवित ने सारा दिन मेहनत की और शाम को हिसाब लगाने पर मालूम हुआ कि सिर्फ पचास रुपए का ही मुनाफा हुआ। इसे कहते हैं खोदा पहाड़ निकली चुहिया।
घर की मुर्गी दाल बराबर — आसानी से प्राप्त वस्तु का कम महत्त्व
वाक्य: इशिता के पिता का बुक स्टोर है इसलिए उसके पास बहुत पेन रहते हैं। वह कभी उनके खो जाने की चिंता नहीं करती क्योंकि घर की मुर्गी दाल बराबर।
चोर की दाढ़ी में तिनका — अपने पाप से डरना
वाक्य: मोहित ने एक लड़के की कॉपी चुराई। अध्यापक के कक्षा में आते ही वह कहने लगा मैंने कॉपी नहीं चुराई। सबको उसी पर शक हो गया क्योंकि चोर की दाढ़ी में तिनका।
चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए — कंजूस व्यक्ति कष्ट सहन कर लेता है पर रुपया खर्च नहीं करता
वाक्य: सेठ जी रोज़ाना रिक्शे में न जाकर पैदल दुकान पर जाते हैं इसलिए सही कहा है—चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए।
जल में रहकर मगर से बैर — आश्रय दाता से बैर
वाक्य: विद्यालय में प्रधानाचार्य से झगड़ना जल में रहकर मगर से बैर की तरह है।
जो गरजते हैं वे बरसते नहीं हैं — डींगें मारने वाले काम नहीं करते
वाक्य: साहिब बाहर दोस्तों में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने का दावा कर रहा था लेकिन बेचारा फेल हो गया। सत्य कहा है—जो गरजते हैं, वे बरसते नहीं।
जिसकी लाठी उसकी भैंस — बलवान की जीत होती है
वाक्य: राशन की दुकान पर गुंडे लोग बिना लाइन के राशन लेते हैं। यह सत्य कहा है—जिसकी लाठी उसकी भैंस।
दूर के ढोल सुहावने — दूर की चीजें अच्छी लगती हैं
वाक्य: गाँवों की प्रशंसा सुनकर मैं एक माह के लिए गाँव गया, लेकिन वहाँ के बुरे वातावरण के कारण जल्दी लौट आया। मैंने यही सोचा—दूर के ढोल सुहावने।
नाच न जाने आँगन टेढ़ा — गुण न होने पर बहाना बनाना
वाक्य: दर्जी ने कोट की सिलाई बिगाड़ दी लेकिन दोष देता है कपड़े पर। इसी को कहते हैं—नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
पाँचों अँगुली घी में होना — आराम से समय गुजारना
वाक्य: वैभव के पिताजी की पाँचों अँगुली घी में हैं क्योंकि उनके सभी लड़के नौकरी करते हैं और वह स्वयं भी कमाते हैं।
मुँह में राम-राम बगल में छुरी — बाहर से सज्जन अंदर से कपटी
वाक्य: आजकल के नेता चिकनी-चुपड़ी बातें करते हैं। उनकी तो मुँह में राम-राम बगल में छुरी वाली बात होती है।
लातों के भूत बातों से नहीं मानते — कई लोग दंड देने पर ही वश में आते हैं
वाक्य: अध्यापक ने कहा कि बिना पिटाई किए कई लड़के गृह कार्य करके नहीं लाते क्योंकि लातों के भूत बातों से नहीं मानते।
सिर मुँड़ाते ही ओले पड़े — काम शुरू करते ही बाधा
वाक्य: रामबाबू ने अपनी दुकान का जैसे ही श्रीगणेश किया, त्यों ही शहर में हड़ताल हो गई। इसी को कहते हैं—सिर मुँड़ाते ही ओले पड़े।
साँप मरे न लाठी टूटे — बिना नुकसान के काम बन जाना
वाक्य: छात्रों की हड़ताल पर प्रधानाचार्य ने अध्यक्ष महोदय से कहा कि ऐसा कदम उठाया जाए जिससे साँप मरे पर लाठी न टूटे।
सावन हरे न भादों सूखे — सदा एक जैसा रहना
वाक्य: बड़े लोगों की सदा एक जैसी हालत रहती है, उनके लिए तो सावन हरे न भादों सूखे।
हाथ कंगन को आरसी क्या — प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं
वाक्य: आप मेरी सारी पुस्तकें देख सकते हैं। मैं सब यहाँ लाया हूँ तो हाथ कंगन को आरसी क्या।
जैसी करनी वैसी भरनी — जो जैसा करता है, वैसा ही उसको फल भी मिलता है
वाक्य: दीप्ति दिन-रात मेहनत करके प्रथम श्रेणी में पास हुई तो सभी ने कहा—जैसी करनी वैसी भरनी।
अभ्यास प्रश्नोत्तर (लोकोक्तियाँ)
I. प्रश्न-अभ्यास
दी गई लोकोक्तियों का अर्थ लिखिए—
(क) घर की मुर्गी दाल बराबर
(ख) अधजल गगरी छलकत जाए
(ग) कंगाली में आटा गीला
(घ) सावन हरे न भादो सूखे
दी गई लोकोक्तियों का वाक्य में प्रयोग कीजिए—
(क) थोथा चना बाजे घना
(ख) चोर की दाढ़ी में तिनका
(ग) सिर मुँड़ाते ही ओले पड़े
II. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर
नीचे लिखी लोकोक्तियों के सही अर्थ छाँटकर उन पर सही ($\checkmark$) का चिह्न लगाइए—
संसद अधिकारी ने हमसे लड़कों की संख्या गिनने को कहा तो हमने तुरंत कहा ...................
(क) आम के आम गुठलियों के दाम
(ख) खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे
(ग) हाथ कंगन को आरसी क्या
(घ) कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा भानुमती के कुनबा जोड़ा
आजकल के कई धर्म प्रचारक वास्तव में घर भरने के उद्देश्य से इस व्यवसाय में लगे हैं; उनका तो वही हाल है कि ...................
(क) छछूँदर के सिर पर चमेली का तेल
(ख) हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और
(ग) चार दिन की चाँदनी फिर अँधेरी रात
(घ) दादा बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपैया
रमन ने जब पिताजी से पाँच हजार रुपए माँगे तो पिताजी ने उसे पाँच सौ रुपए ही दिए तब माँ ने कहा ...................
(क) अशर्फियाँ लुटे कोयले पर मोहर
(ख) कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली
(ग) ऊँट के मुँह में जीरा
(घ) अपनी-अपनी ढफली अपना-अपना राग
इतने अच्छे नृत्य को देखकर जब दर्शकों ने तालियाँ न बजाईं तो मुझे लगा ...................
(क) बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद
(ख) अधजल गगरी छलकत जाय
(ग) मान न मान मैं तेरा मेहमान
(घ) हाथ कंगन को आरसी क्या
रुपए और सामान चोरी होने पर पुलिस को कुछ सामान मिल गया तो सबने यही कहा कि ...................
(क) थोथा चना बाजे घना
(ख) जाको राखे साइयाँ मार सके न कोय
(ग) भागते चोर की लँगोटी सही
(घ) चिराग तले अँधेरा
कम अंक आने पर पिताजी ने मुझे ................... लिया।
(क) त्योरियाँ चढ़ाना
(ख) बीड़ा उठाना
(ग) आड़े हाथों
(घ) नजरों से गिरना
भारतीय सेना ने शत्रुओं की ................... दी।
(क) दाँतों तले उँगली दबाना
(ख) तिल का ताड़ बनाना
(ग) ज़हर का घूँट पीना
(घ) ईंट से ईंट बजाना
अपराधी को सामने पाकर इंस्पेक्टर का ................... गया।
(क) दाँतों तले उँगली दबाना
(ख) खून खौलना
(ग) पैरों तले ज़मीन खिसकना
(घ) प्राणों की बाजी लगाना
नेहा ने दीपक को समझाया कि गलत लोगों से दोस्ती करके ................... मारो।
(क) अक्ल पर पत्थर पड़ना
(ख) अपने पाँव पर स्वयं कुल्हाड़ी मारना
(ग) अड़ियल टट्टू
(घ) इशारे पर नाचना
उत्तर कुंजी:
(1) (क) | (2) (ग) | (3) (क)
(4) (घ) | (5) (घ) | (6) (ख)
(7) (ग) | (8) (घ) | (9) (ख)
(10) (ख)
0 Comments